पृथ्वी पर गिरे उल्कापिंड से हुआ शनिदेव की इस मूर्ति का निर्माण, जानें त्रेता युगीन शनिचरा मंदिर की कहानी

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यूं तो हमारे देश में असंख्य शनि मंदिर हैं, लेकिन शनिदेव के प्राचीन एवं ऐतिहासिक धाम गिने-चुने ही हैं। इनमें सबसे प्राचीन माना जाता है मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर ग्वालियर से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित शनिचरा मंदिर। मुरैना के ऐंती ग्राम में जिस जगह यह मंदिर बना हुआ है, उसे शनि पर्वत भी कहा जाता है। कथा है कि जब त्रेता युग में हनुमान जी माता सीता का पता लगाते हुए लंका पहुंचे, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके सखा शनिदेव को रावण ने बंदी बना कर अपने पैरों के नीचे आसन की तरह रख छोड़ा है। हनुमान जी ने उन्हें वहां से मुक्त तो करा लिया, लेकिन इतने बरसों से रावण के पैरों तले दबे रह कर शनिदेव अत्यधिक दुर्बल हो गए थे और चल तक नहीं पा रहे थे। तब उन्होंने हनुमान जी से कहा कि आप मुझे भारत भूमि की तरफ उछाल दो। हनुमान जी ने ऐसा ही किया और शनिदेव इस पर्वत पर आ गिरे। यहां उन्होंने घोर तपस्या कर अपने बल को फिर से प्राप्त किया। कालांतर में यहां उनका मंदिर बना।

मान्यता है कि यहां स्थापित शनिदेव की अति प्राचीन मूर्ति का निर्माण अंतरिक्ष से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से किया गया है, जिसकी स्थापना चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने करवाई थी। बाद में सिंधिया घराने के महाराज दौलत राव सिंधिया द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया। अब इस मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। मंदिर परिसर में एक कुंड है, जिसमें भक्तगण स्नान करने के बाद अपने पहने सभी वस्त्रों को त्याग देते हैं। मंदिर परिसर में शनिदेव के ठीक सामने ही हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित है। यह भी कहा जाता है कि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर में स्थापित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ही ले जाई गई है। हर शनिवार को यहां हजारों की संख्या में भक्त आते हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती के अवसर पर लगने वाले मेले में यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। मंदिर में प्रवेश के लिए लगने वाली कतारों के निकट ही शनिदेव पर चढ़ाए जाने वाले तेल को एकत्र करने की व्यवस्था है। किसी भी जगह तेल चढ़ाइए, वह इकट्ठा होकर एक ही जगह पहुंचता है और वहां से सीधे शनिदेव की मूर्ति के ऊपर लगे एक पाइप से उन पर लगातार गिरता रहता है।

कैसे पहुंचें: पहले ग्वालियर पहुंचें, ग्वालियर से सरकारी रोडवेज की बसें ऐंती जाती हैं। आप टैक्सी या ऑटोरिक्शा बुक करके भी ऐंती पहुंच सकते हैं।