नागरिकता कानून पर भाजपा का रुख साफ, किसी से भी बात करने को तैयार: अमित शाह

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गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (13 फरवरी) को कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं को ‘देश के गद्दारों को’ और ‘भारत- पाकिस्तान मैच’ जैसे बयान नहीं देने चाहिए थे। संभव है कि इस तरह की टिप्पणियों से पार्टी की हार हुई हो। पार्टी ने इस तरह के बयानों से खुद को अलग कर लिया है। हालांकि, शाह ने कहा कि भाजपा केवल जीत या हार के लिए चुनाव नहीं लड़ती है बल्कि चुनावों के मार्फत अपनी विचारधारा के प्रसार में भरोसा करती है।

एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में शाह ने एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि दिल्ली चुनावों के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों के कारण भाजपा को नुकसान हुआ होगा। गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली चुनावों पर उनके आकलन गलत हुए, लेकिन जोर दिया कि चुनाव परिणाम नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर जनादेश नहीं था। उन्होंने कहा, जो कोई भी सीएए से जुड़े मुद्दों पर मुझसे चर्चा करना चाहता है मेरे कार्यालय से समय ले सकता है। हम तीन दिनों के अंदर समय देंगे। शाह ने कांग्रेस को धर्म के आधार पर विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया।

कश्मीर में हालात सामान्य
गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हैं। वहां पर कोई भी आ जा सकता है। अगर कोई वहां पर भड़काने वाले भाषण करेगा तो सरकार को कदम उठाने पड़ेंगे। उन्होंने साफ किया कि कुछ नेता कुछ प्रावधानों के तहत नजरबंद हैं। आरक्षण के मुद्दे पर गृहमंत्री ने कहा कि वे पूरे देश की जनता खासकर अनुसूचित जाति व जनजाति को बताना चाहते हैं कि सर्वोच्च अदालत का जो फैसला आया है वह उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार के कारण आया है। वह रुख कांग्रेस सरकार का था, भाजपा की सरकार का नहीं।

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