भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा सकता है पर्यटन उद्योग, 50 अरब डॉलर के राजस्व का लक्ष्य

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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कान्त ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के पर्यटन उद्योग को 2022 तक 50 अरब डॉलर का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन ऐसा क्षेत्र है जिसका अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है और यह वृद्धि और रोजगार को आगे बढ़ाने में भी योगदान देता है। 

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के 15वें वार्षिक पर्यटन सम्मेलन-2019 को संबोधित करते हुए अमिताभ कान्त ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। देश में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। 

उन्होंने कहा, ”इसका अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक असर होता है। यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो काफी रोजगार के अवसरों का सृजन कर सकता है, भारत को आज वृद्धि और रोजगार की सबसे अधिक जरूरत है। 

वर्ष 2018 में पर्यटन से भारत की आय 28.6 अरब डॉलर रही थी। अमिताभ कान्त ने कहा कि हमें इसे 2022 तक 50 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चलना चाहिए।  हालांकि, वैश्विक स्तर पर पर्यटन से होने वाली आय की बात की जाए, तो वैश्विक आय में भारत का हिस्सा सिर्फ 1.97 प्रतिशत का है। 

वहीं वैश्विक स्तर पर पर्यटकों की आवाजाही में भारत का हिस्सा सिर्फ 1.2 प्रतिशत है। नीति के मोर्चे पर अमिताभ कान्त ने कहा कि सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को सहयोग दिया है। होटल कमरों पर जीएसटी दरें घटाई गई हैं। 

होटल के 7,500 रुपये तक किराये वाले कमरों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को 18 से घटाकर 12 प्रतिशत किया है। इसी तरह 7,500 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों पर जीएसटी दर को 28 से घटाकर 18 प्रतिश्त किया गया है। 1,000 रुपये रात्रि के किराये वाले कमरों पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। 

अमिताभ कान्त ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह निजी क्षेत्र है। इस क्षेत्र में पर्यटक के आने से लेकर उसके जाने तक सभी गतिविधियां निजी क्षेत्र द्वारा की जाती हैं। पर्यटक आपरेटर, ट्रैवल एजेंट, टूरिस्ट गाइड, कैब परिचालक, रिजॉर्ट से लेकर होटल तक सभी निजी क्षेत्र द्वारा चलाए जाते हैं। 

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